ब्रजेश कृष्ण 

बहुत उत्साहित हैं वे इन दिनों

वे नए और अच्छे और कलफ़दार कड़क कपड़े पहनकर आते हैं हमारे बीच

पहले तो मैं जानता था

उन सभी को अलग अलग

उनके नाम के हिज्जों के साथ

 

पहचान लेता था दूर से ही

उनकी अलग अलग आवाज

उनकी हर एक हरकत पर

रहती थी मेरी नजर

मगर इन दिनों

जबकि शोर में डूबो दिया

उन्होंने सभी कुछ

वे उत्साहित हैं बहुत

और मैं खो रहा हूं तेजी से

उन्हें पहचानने की ताकत

 

वे बोलते हैं एक ही भाषा

एक जैसा ही उनका वाक्य-विन्यास

एक जैसी ध्वनि

और एक जैसी हंसी

मैं परेशान हूं इन दिनों

कि फैल रही धुंध की एक परत

मेरे आस पास

या शायद बढ़ रहा है

मेरे चश्मे का नंबर उम्र के साथ

और सबसे बड़ी मुश्किल तो ये

कि कीर्तनियों का पार्श्व संगीत

ऐसा और इतना इतना अनवरत

कि मुझे यकीन सा होने लगता है

उनकी बातों पर

सचमुच बहुत उत्साहित हैं वे

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