सावित्रीबाई फुले जयंती पर काव्य-गोष्ठी

रिपोर्ट


कुरुक्षेत्र स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले सावित्री बाई फुले पुस्तकालय एवं शोधकेन्द्र में 3 जनवरी 2018 को देस हरियाणा द्वारा भारत की पहली शिक्षिका एवं समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले जयंती की जयंती मनाई गई। सृजनकर्मियों ने सावित्री फुले की रचनाओं का पाठ करके व उन चर्चा करके उन्हें श्रद्धांजलि दी। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार ओम प्रकाश करुणेश, हरफाल गाफिल व सैनी सभा के प्रधान गुरनाम सैनी ने संयुक्त रूप से की।

देस हरियाणा के सम्पादक डॉ. सुभाष चन्द्र ने कहा कि सावित्री बाई फुले नारी मुक्ति की योद्धा हैं, जिन्होंने सत्य व न्याय के मूल्यों की स्थापना करने के लिए रूढि़वाद-अंधविश्वास एवं पाखंड का जबरदस्त विरोध किया। दलितों-वंचितों के मानवीय गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार के लिए मनुवाद के स्थान पर मानवतावादी चेतना का प्रसार किया।

कार्यक्रम में राजीव सान्याल ने क्रांतिकारी कवि अवतार सिंह पाश की कविता गाकर सुनाई। इस मौके पर बलजीत सैनी, सुरेन्द्रपाल सिंह, सुनील थुआ, अरुण कैहरबा, विपुला, गुरनाम कैहरबा, विकास साल्यान, इकबाल, प्रवीण बौद्ध, विजय विद्यार्थी, प्रदीप स्वामी, अविनाश कौर, कपिल बत्रा, प्रियंका, राजेन्द्र देसवाल व नरेश पबनावा सहित अनेक रचनाकार उपस्थित रहे।

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Prof. Subhash Chander

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र में हिन्दी विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत। जातिवाद, साम्प्रदायिकता, सामाजिक लिंगभेद के खिलाफ तथा सामाजिक सद्भभाव, साम्प्रदायिक सद्भाव, सामाजिक न्याययुक्त समाज निर्माण के लिए निरंतर सक्रिय। साहित्यिक, सांस्कृतिक व सामाजिक सवालों पर पत्र-पत्रिकाओं में लेखन।लेखन, संपादन व अनुवाद की लगभग बीस पुस्तकों का प्रकाशन प्रकाशित पुस्तकेंः साझी संस्कृति; साम्प्रदायिकता; साझी संस्कृति की विरासत; दलित मुक्ति की विरासतः संत रविदास; दलित आन्दोलनःसीमाएं और संभावनाएं; दलित आत्मकथाएंः अनुभव से चिंतन; हरियाणा की कविताःजनवादी स्वर; संपादनः जाति क्यों नहीं जाती?; आंबेडकर से दोस्तीः समता और मुक्ति; हरियणावी लोकधाराः प्रतिनिधि रागनियां; मेरी कलम सेःभगतसिंह; दस्तक 2008 व दस्तक 2009; कृष्ण और उनकी गीताः प्रतिक्रांति की दार्शनिक पुष्टि; उद्भावना पत्रिका ‘हमारा समाज और खाप पंचायतें’ विशेषांक; अनुवादः भारत में साम्प्रदायिकताः इतिहास और अनुभव; आजाद भारत में साम्प्रदायिकता और साम्प्रदायिक दंगे; हरियाणा की राजनीतिः जाति और धन का खेल; छिपने से पहले; रजनीश बेनकाब। विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों से जुड़ाव। संपादक – देस हरियाणा हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा आलोचना क्षेत्र में पुरस्कृत।