हरियाणवी चुटकले

हरियाणवी चुटकले

1

एक बै एक आदमी ने बस खरीद ली अर चलाण खात्तिर एक ड्राईवर राख लिया। ओ मालिक था घणाए बेईमान, सारी हाठा न्यूं सोचदा अक् कड़े यू ड्राईवर किमे न किमे राछ ना बदल ले। ड्राईवर ने बस चलाण तांही गेर लाया तो ओ पास में एक खडय़ा था-न्यूं बोल्या-के करै सै? ड्राईवर बोल्या-गेर बदलूं सूं। मालिक फट बोल्या-देख्या, मैं पहल्यां ए सोच्चूं था तूं किमे न किमे जरूर बदलेगा।

2

एक बै एक गादड़ अर एक गादड़ी रैहट पै पाणी पीण चले गए जब गादड़ी पाणी पीण लागदी तो रैहट की कटा-कट की आवाज तै पाणी पीणा छोड़ देंदी। गादड़ बोल्या-के बात सै? गादड़ी बोली अक् जब मैं पाणी पीण लागूं सूं या कटा-कट होण लागज्या सै। गादड़ नै समझाया अक् बावली इस कटा-कट म्हैं ए पी गी तो पी गी ना तो तिसाइये रह ज्यागी।

Advertisements

Published by

Prof. Subhash Chander

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र में हिन्दी विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत। जातिवाद, साम्प्रदायिकता, सामाजिक लिंगभेद के खिलाफ तथा सामाजिक सद्भभाव, साम्प्रदायिक सद्भाव, सामाजिक न्याययुक्त समाज निर्माण के लिए निरंतर सक्रिय। साहित्यिक, सांस्कृतिक व सामाजिक सवालों पर पत्र-पत्रिकाओं में लेखन।लेखन, संपादन व अनुवाद की लगभग बीस पुस्तकों का प्रकाशन प्रकाशित पुस्तकेंः साझी संस्कृति; साम्प्रदायिकता; साझी संस्कृति की विरासत; दलित मुक्ति की विरासतः संत रविदास; दलित आन्दोलनःसीमाएं और संभावनाएं; दलित आत्मकथाएंः अनुभव से चिंतन; हरियाणा की कविताःजनवादी स्वर; संपादनः जाति क्यों नहीं जाती?; आंबेडकर से दोस्तीः समता और मुक्ति; हरियणावी लोकधाराः प्रतिनिधि रागनियां; मेरी कलम सेःभगतसिंह; दस्तक 2008 व दस्तक 2009; कृष्ण और उनकी गीताः प्रतिक्रांति की दार्शनिक पुष्टि; उद्भावना पत्रिका ‘हमारा समाज और खाप पंचायतें’ विशेषांक; अनुवादः भारत में साम्प्रदायिकताः इतिहास और अनुभव; आजाद भारत में साम्प्रदायिकता और साम्प्रदायिक दंगे; हरियाणा की राजनीतिः जाति और धन का खेल; छिपने से पहले; रजनीश बेनकाब। विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों से जुड़ाव। संपादक – देस हरियाणा हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा आलोचना क्षेत्र में पुरस्कृत।