सिद्दीक अहमद मेव

उत्सव हरियाणा सृजन

सिद्दीक अहमद मेव

एक साथ इतने हैं रंग,
देख के मैं तो रह गया दंग,,
कोई गा रहा दफ पर यहां,
कोई बजा रहा है मृदंग,
उत्सव हरियाणा सृजन।

कहीं कवि बिखेर रहे हैं रंग,
कहीं हैं बच्चों के सब रंग,,
हो रही विचारों की हैं जंग,
है संस्कृतियों का ये संगम,
है सबसे उत्तम यही रंग,,
उत्सव हरियाणा सृजन।

सजी हुई हैं यहां किताबें,
मैगजीनों के बिखेरे हैं रंग,,
आर्ट रंग चित्रकार यहां पे,
पम्फलेटों के बिखरे रंग,
हैं साहित्य का ये संगम,
उत्सव हरियाणा सृजन।

कोई दिल्ली से कोई चण्डीगढ,
कोई बिखेर रहा मुंबइया रंग,
बंगाल के रंग पंजाब रंग,
हैं बांगर- मगर का संगम,
उत्सव हरियाणा सृजन।

यहां धर्म मजहब और जाति नहीं,
संस्कृति के सब बिखेरे रंग,
कदम से कदम मिला साथी,
फिर देख प्यार के सुन्दर रंग,
हिन्दू-मुस्लिम और सिख यहां,
सब रंगे हुए हैं एक रंग,
उत्सव हरियाणा सृजन।

लेखक, विचारक और कवि,
रंगकर्मी अभिनेता हैं संग
सब की वाणी मे गूंज रही,
मीठी-मीठी सुन्दर सरगम,
भिन्न-भिन्न बिखरे हैं रंग,
उत्सव हरियाणा सृजन।।

स्रोतः सं. सुभाष चंद्र, देस हरियाणा (मई-जून 2018), पेज – 35

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Prof. Subhash Chander

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र में हिन्दी विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत। जातिवाद, साम्प्रदायिकता, सामाजिक लिंगभेद के खिलाफ तथा सामाजिक सद्भभाव, साम्प्रदायिक सद्भाव, सामाजिक न्याययुक्त समाज निर्माण के लिए निरंतर सक्रिय। साहित्यिक, सांस्कृतिक व सामाजिक सवालों पर पत्र-पत्रिकाओं में लेखन।लेखन, संपादन व अनुवाद की लगभग बीस पुस्तकों का प्रकाशन प्रकाशित पुस्तकेंः साझी संस्कृति; साम्प्रदायिकता; साझी संस्कृति की विरासत; दलित मुक्ति की विरासतः संत रविदास; दलित आन्दोलनःसीमाएं और संभावनाएं; दलित आत्मकथाएंः अनुभव से चिंतन; हरियाणा की कविताःजनवादी स्वर; संपादनः जाति क्यों नहीं जाती?; आंबेडकर से दोस्तीः समता और मुक्ति; हरियणावी लोकधाराः प्रतिनिधि रागनियां; मेरी कलम सेःभगतसिंह; दस्तक 2008 व दस्तक 2009; कृष्ण और उनकी गीताः प्रतिक्रांति की दार्शनिक पुष्टि; उद्भावना पत्रिका ‘हमारा समाज और खाप पंचायतें’ विशेषांक; अनुवादः भारत में साम्प्रदायिकताः इतिहास और अनुभव; आजाद भारत में साम्प्रदायिकता और साम्प्रदायिक दंगे; हरियाणा की राजनीतिः जाति और धन का खेल; छिपने से पहले; रजनीश बेनकाब। विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों से जुड़ाव। संपादक – देस हरियाणा हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा आलोचना क्षेत्र में पुरस्कृत।