देस हरियाणा

नया साल

रामधारी खटकड़

नया साल जै ऐसा आज्या , खुल कै खुशी मनाऊँ
रै सब सुख तै जीवैं , मैं ऐसी दुनिया चाहूँ…(टेक)

बेकारी ना हो किते , हर युवा को रुजगार मिलै
बेसहारा कोय ना हो , जिम्मेदार सरकार मिलै
लावारिस कोय बच्चा ना हो,सबको घर-परिवार मिलै
कन्याओं का मान हो जग म्हं,इन्हें सुखी संसार मिलै
यारां का कोय यार मिलै तो झट छाती कै लाऊँ..
रै सब सुख तै जीवैं , मैं ऐसी दुनियां चाहूँ…

पाखण्डां तै दूर रहैं सब , वैज्ञानिक आधार बणै
कर्मचारी कोय दुखी मिलै ना,पक्का हर रोजगार बणै
किसानां म्हं हो खुशहाली , वो धरती का शृंगार बणै
शोषण हो ना मजदूरां का , फेर गुलो-गुलजार बणै
शिक्षा का हथियार बणै तो अँधेरा दूर भगाऊँ…..
रै सब सुख तै जीवैं मैं ऐसी दुनियां चाहूँ

गली-गली हो भाईचारा , ना झगडा जात-धर्म का हो
बेईमानी का खोज मिलै ना , आदर नेक कर्म का हो
आपस का हो लिहाज सभी म्हं,साच्चा बोल मर्म का हो
नाड़ किसे की झुकै नहीं, जै आलम लाज-शर्म का हो
ना अपमान किते भी नर्म का हो , ना किसे नै बेबस पाऊँ……
रै सब सुख तै जीवैं मैं ऐसी दुनियां चाहूँ…..

संसाधन ना लुटैं किसे के , ताकतवर बदकार ना हो
जल-जंगल-जमीन खुसै ना, आदम जन लाचार ना हो
कितना-ए बड्डा देश हो , वो जग का थाणेदार ना हो
मुनाफे खातर जुल्म करै जो , ऐसा साहूकार ना हो
‘रामधारी’ तलवार ना हो , मैं हाथ म्हं कलम उठाऊँ…
रै सब सुख तै जीवैं मैं ऐसी दुनियां चाहूँ….

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