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Category: कविता

पीछा करो उनका

ब्रजेश कृष्ण

 

बड़े चतुर हैं वे

गजब के वाचाल और जादूगर

रूमाल झटकते हैं

तो उड़ने लगती हैं रंग-बिरंगी तितलियां

खाली डिब्बों पर घुमाते हैं अपना हाथ

और आसमान भर जाता है पतंगों से

हमें दिखाई नहीं देती उनकी अदृश्य

बहुत उत्साहित हैं वे

ब्रजेश कृष्ण 

बहुत उत्साहित हैं वे इन दिनों

वे नए और अच्छे और कलफ़दार कड़क कपड़े पहनकर आते हैं हमारे बीच

पहले तो मैं जानता था

उन सभी को अलग अलग

उनके नाम के हिज्जों के साथ

 

पहचान लेता

राजस्थानी कविताएं – रामस्वरूप किसान

राजस्थानी कविताएं – रामस्वरूप किसान ‘हिवड़ै उपजी पीड़ सुप्रसिद्ध राजस्थानी लोक कवि रामस्वरूप किसान जी ने ये कविताएं देस हरियाणा द्वारा आयोजित तीसरे हरियाणा सृजन उत्सव में हुए बहुभाषी राष्ट्रीय कवि सम्मेलन मे सुनाई थी।

जलियांवाला बाग का बसन्त – सुभद्राकुमारी चौहान

 

यहाँ कोकिला नहीं, काग हैं, शोर मचाते,
काले काले कीट, भ्रमर का भ्रम उपजाते।

कलियाँ भी अधखिली, मिली हैं कंटक-कुल से,
वे पौधे, व पुष्प शुष्क हैं अथवा झुलसे।

परिमल-हीन पराग दाग़ सा बना पड़ा है,
हा! यह प्यारा