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Category: गजल

ज़माने में नया बदलाव लाने की ज़रूरत है

महावीर ‘दुखी’ 

ज़माने में नया बदलाव लाने की ज़रूरत है,
अकीदों का सड़ा मलबा उठाने की ज़रूरत है।

उजालों के तहफ्फुज में कभी कोई न रह जाए,
अंधेरों को सिरे से अब मिटाने की ज़रूरत है।

हमें जो आज तक

एक मधुर सपना था, आख़िर टूट गया

महेन्द्र प्रताप ‘चांद’

(वरिष्ठ शायर महेंद्र प्रताप चांद अंबाला में रहते हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में लंबे समय तक पुस्तकालय अध्यक्ष रहे। पचासों साल से अपनी लेखनी से उर्दू ग़ज़ल को समृद्ध कर रहे है।)
गज़ल

एक मधुर सपना था,

सीली बाळ रात चान्दनी आए याद पिया

 

कर्मचन्द ‘केसर’ 

ग़ज़ल

सीळी बाळ रात चान्दनी आए याद पिया।
चन्दा बिना चकौरी ज्यूँ मैं तड़फू सूँ पिया।

तेरी याद की सूल चुभी नींद नहीं आई,
करवट बदल-बदल कै मेरी बीती रात पिया।

उर्वर धरती बंजर होज्या जोते बोये