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Category: देस हरियाणा

सोंद्या कै तो काटड़े ही जामें

हरियाणवी लोककथा

एक गाम म्हं दो पाळी आपणे डांगर चराया करदे। एक रात नै दोनों की म्हैस ब्याण का सूत बेठग्या। उनमैं जो आलसी था वो बोल्या भाई मैं नींद काढल्यूं। मेरी म्हैंस नै संभाळ लिए।

दूसरा बोल्या – ठीक

निजी स्कूल शिक्षा के प्रति बढ़ रहा असंतोष

 दीपक राविश

किसी भी जागरूक एवं विकासशील समाज को शिक्षा-व्यवस्था पर लगातार विचार-विमर्श करते हुए से धारदार बनाने के प्रयास करते रहने चाहिएं। किसी समाज की शिक्षा-व्यवस्था जितनी चुस्त-दुरुस्त तथा समाजपयोगी होगी, वह समाज उतना ही सुखी तथा समृद्ध होगा।

बुद्ध के सिंद्धांत और उपदेश – डा. भीमराव आंबेडकर

डा. आंबेडकर ने एक पुस्तक लिखी ‘बुद्ध अथवा कार्ल मार्क्स ‘। इसमें दोनों दार्शनिकों के सिद्धातों की तुलना की।उन्होंने यह इस उम्मीद से किया था कि इससे वर्तमान में चल रहे विमर्श पर जरूर असर पड़ेगा और क्रांतिकारी शक्तियां परंपरा

‘हम नहीं रोनी सूरत वाले’ : सावित्रीबाई फुले की कविताई     

बजरंग बिहारी तिवारी

जीवन की गहरी समझ के साथ काव्य-रचना में प्रवृत्त होने वाली सावित्रीबाई फुले (1831-1897) अपने दो काव्य-संग्रहों के बल पर सृजन के इतिहास में अमर हैं. उनका पहला संग्रह ‘काव्यफुले’ 1854 में तथा दूसरा ‘बावन्नकशी सुबोधरत्नाकर’