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Category: भाषा/संस्कृति/सिनेमा

वैदिक साहित्य में भाषाई चिन्तन- डॉ. रणवीर सिंह

  वैदिक साहित्य में सभी स्तरों पर भाषा के संबंध में सूक्ष्म चिन्तन किया गया है । ऋग्वेद के कई पूरे सूक्तों में तथा अन्य वेदों, ब्राह्मणों,आरण्यकों,उपनिषदों व वेदांगों में भाषा का  वाक् के रूप में विस्तृत वर्णन प्राप्त होता है

एक हजार बरस पहले हिन्दुस्तान में मौलिक चिंतन समाप्त हो गया – डॉ.लोहिया

डा.राम मनोहर लोहिया भारतीय स्वतनत्रता सेनानी, प्रखर विचारक, राजनेता और सुप्रसिद्ध समाजवादी थे। डॉ.लोहिया  विचारों के बल पर राजनीति का रुख बदलने वाले नेता थे। डॉ.लोहिया ने हमेशा भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में अंग्रेजी से अधिक हिंदी को

राष्ट्रीय एकता और भाषा की समस्याः भीष्म साहनी

साहनी

मैं भाषा वेज्ञानिक नहीं हूं, भाषाएं कैसे बनती और विकास पाती हैं, कैसे बदलती हैं, इस बारे में बहुत कम जानता हूं, इसलिए किसी अधिकार के साथ भाषा के सवाल पर नहीं बोल सकता । मेरी अपनी स्थिति भी अनूठी

हिंदी भाषा चुनौतियां और समाधान – मोहम्मद इरफान मलिक

मोहम्मद इरफान मलिक
अरबी विभाग
पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला

यह लेख हरियाणा सृजन उत्सव 2019 में पंजाबी युनिवर्सिटी पटियाला, अरबी विभाग के मोहम्मद इरफान मलिक ने पेश किया था। प्रस्तुत है उसका हिंदी अनुवाद।

हिंदी भारतीय सभ्यता, संस्कृति और समाज की