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Category: भाषा/संस्कृति/सिनेमा

साहित्य का स्व-भाव और राजसत्ता

आलेख


बजरंग बिहारी तिवारी

     भारतीय मानस धर्मप्राण है इसलिए भारतीय साहित्य अपने स्वभाव में अध्यात्मवादी, रहस्यवादी है; यह धारणा औपनिवेशिक दौर में बनी। राजनीति में साहित्य की दिलचस्पी आधुनिक काल में शुरू होती है; इस बेबुनियाद मान्यता की निर्मिति भी

हरियाणवी लोक सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक है पगड़ी – महासिंह पूनिया

महासिंह पूनिया

                किसी समाज की संस्कृति, रहन-सहन, भोजन व वेशभूषा को वहां के जीवनयापन के साधन व वहां की जलवायु सर्वाधिक प्रभावित करती है। अस्तित्व के संघर्ष में उत्पन्न आवश्यक वस्तुएं कालांतर में सांस्कृतिक प्रतीकों व चिह्नों में तब्दील हो

सीक्रेट सुपरस्टार : मुखर अभिव्यक्ति है महिलाओं के डर की

सिनेमा

सीक्रेट सुपरस्टार :मुखर अभिव्यक्ति है महिलाओं के डर की

किशु गुप्ता

समस्त बन्धनों को तोडकर अपने सपनों को सच करने की कहानी है सीक्रेट सुपरस्टार। समर्पित है हर औरत को व हर मां को जो जीवन में कुछ करने

ज़ोहरा बाई अम्बाला वाली (अम्बाला) – महेन्द्र प्रताप चांद

आलेख


महेन्द्र प्रताप चांद

ज़ोहराबाई का जन्म सन् 1922 के आसपास हुआ। उनके जन्म-स्थान के बारे में कोई प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन वे पिछली सदी के चौथे दशक में अम्बाला शहर के हुस्न के बाज़ार की रौनक थीं।