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Category: लोक कथा

सोंद्या कै तो काटड़े ही जामें

हरियाणवी लोककथा

एक गाम म्हं दो पाळी आपणे डांगर चराया करदे। एक रात नै दोनों की म्हैस ब्याण का सूत बेठग्या। उनमैं जो आलसी था वो बोल्या भाई मैं नींद काढल्यूं। मेरी म्हैंस नै संभाळ लिए।

दूसरा बोल्या – ठीक

कछुआ और खरगोश – इब्ने इंशा

लोक कथा

एक था कछुआ, एक था खरगोश। दोनों ने आपस में दौड़ की शर्त लगाई। कोई कछुए से पूछे कि तूने शर्त क्यों लगाई? क्या सोचकर लगाई?

बहरहाल…तय यह हुआ कि दोनों में से जो नीम के टीले तक

हुण दस्स चौकीदारा! – हिमाचली लोक कथा

प्रस्तुती – दुर्गेश नंदन

एक चोर था । छोटी-मोटी चोरियां करके अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहा था पर गुज़ारा वामुश्किल होता । चोर ने एक योजना बनाई और एक बड़ा हाथ मारने की ठानी । अपने काम

म्हारै गाम का चौकीदार – #MainBhiChowkidar

म्हारै गाम का चौकीदार

बोहत टैम पहल्यां की बात सै। म्हारै गाम म्हं एक चौकीदार था। उसके बोहत सारे काम थे। गाम कुछ भी होंदा उसका गोहा (संदेशा, मुनियादी) उसने ए देणा पड़े करदा। कोटा म्हं चीनी मिलणी होंदी, माटी