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Category: लोक कथा

दुनिया जीण कोनी दींदी

 हरियाणवी लोक कथा


एक बर एक जवान आपणी घरआळी नैं लेण गया। सवारी खातर उसनैं घोड़ी ले ली। वापसी म्हं दोनों घोड़ी पै सवार होकै चाल पड़े।

रास्ते म्हं एक गाम तै लिकडऱे थे तो उननैं देख कै लोग बोल्ले,

कौआ और चिड़िया

लोक कथा


                एक चिड़िया थी अर एक था कौआ। वै दोनों प्यार प्रेम तै रह्या करै थे। एक दिन कौआ चिड़िया तै कहण लाग्या अक् चिड़िया हम दोनों दाणे-दाणे खात्तर जंगलां म्हं फिरैं, जै हम दोनों सीर मैं खेती कर

झोटा अर शेर

लोक कथा

एक आदमी कैदो मैंस थी। उसका छोरा उननै चराण जाया करदा। दोनू मैंस ब्यागी। एक नै दिया काटड़ा अर दूसरी नै दी काटड़ी। वो काटड़ा घणा ऊत था। वो उस काटड़ी नै सारा दिन तंग करदा। काटड़ी नै

गादड़ का चौंतरा – लोक कथा

हरियाणवी लोक कथा


एक गादड़ था, वो अपणा चौंतरा बणा कै, लीप-पोत कै, साफ-सुथरा राख्या करता। वो अपणा रोब भोत राख्या करता। वो न्यू जाणता के सारा जंगल तेरा कह्या मानै। एक दिन वो खूब सज-धज कै अपणे  चौंतरे पै