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Category: साहित्य

हुण दस्स चौकीदारा! – हिमाचली लोक कथा

प्रस्तुती – दुर्गेश नंदन

एक चोर था । छोटी-मोटी चोरियां करके अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहा था पर गुज़ारा वामुश्किल होता । चोर ने एक योजना बनाई और एक बड़ा हाथ मारने की ठानी । अपने काम

छाती, तू और मैं – निकिता आजाद

nikनिकिता आजाद (युनिवर्सिटी ऑफ आक्सफोर्ड) में पढ़ी हैं। उन्होंने  ‘हैपी टु ब्लीड’ लिखे सैनिटरी नैपकिन के साथ अपनी तसवीर पोस्ट करते हुए लोगों को पितृसत्तात्मक रवैए के खिलाफ खड़े होने की अपील की थी और सोशल मीडिया पर #happytobleed

सोनकेसी – पहाड़ी लोक-कथा

एक बार एक साहुकार था। उसके चार पुत्र थे ।चार में से बड़े तीन पुश्तैनी धन्धे के साथ अपना-अपना काम धन्धा  भी करते थे पर सबसे छोटा बेटा कोई काम-धाम नहीं करता था । उसकी इस आदत की वजह से

” झुकना मत “

” झुकना मत “

जैसे ही डाक्टर ने कहा
झुकना मत।
अब और झुकने की
गुंजाइश नही…
सुनते ही उसे..
हँसी और रोना ,
एक साथ आ गया।

ज़िंदगी में पहली बार वह
किसी के मुँह से सुन रही थी