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Category: साहित्य विमर्श

‘हम नहीं रोनी सूरत वाले’ : सावित्रीबाई फुले की कविताई     

बजरंग बिहारी तिवारी

जीवन की गहरी समझ के साथ काव्य-रचना में प्रवृत्त होने वाली सावित्रीबाई फुले (1831-1897) अपने दो काव्य-संग्रहों के बल पर सृजन के इतिहास में अमर हैं. उनका पहला संग्रह ‘काव्यफुले’ 1854 में तथा दूसरा ‘बावन्नकशी सुबोधरत्नाकर’

राष्ट्रीय एकता और भाषा की समस्याः भीष्म साहनी

साहनी

मैं भाषा वेज्ञानिक नहीं हूं, भाषाएं कैसे बनती और विकास पाती हैं, कैसे बदलती हैं, इस बारे में बहुत कम जानता हूं, इसलिए किसी अधिकार के साथ भाषा के सवाल पर नहीं बोल सकता । मेरी अपनी स्थिति भी अनूठी

सामंती व्यवस्था से टकराता साहित्यकार

  बी. मदन मोहन,    प्रस्तुति—विकास साल्याण

तीसरे हरियाणा सृजन उत्सव के दौरान 9 फरवरी 2019 को ‘लेखक से संवाद’ सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें हिमाचल के प्रख्यात साहित्यकार एस.आर. हरनोट के साथ श्रोताओं ने संवाद करना था, लेकिन स्वास्थ्य के

संतराम उदासीः जन संघर्षों व आंदोलनों का प्रेरक- प्रोफेसर सुभाष चंद्र

संतराम उदासी का संबंध पंजाबी कविता की क्रांतिकारी धारा से है। संतराम उदासी की रचनाओं में दलित कविता तथा इंकलाबी कविता के सरोकारों का संगम है। संतराम उदासी का संबंध समाज के सदियों से दलित-अछूत समझी जाने वाली जाति (महजबी