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Category: हरियाणवी लोक-विनोद

लेके रहेंगे-लेके रहेगे

एक बै जागरूक माच्छरां नै मिलकै एक सभा बुलाई-उनका नेता बोल्या-भाईयो! ‘हमारे साथ बड़ी बेइन्साफी हो रही है-जुल्म ढाए जा रहे हैं। देखो-साबुन के लिए साबुणदानी, मसालों के लिए मसालादानी’ चूहों के लिए चूहेदानी-परन्तु हमारी माच्छरदानी पर तो माणसां नै

मेज तलै है जी

एक बै एक स्कूल में डी.ओ. चली गई। उस स्कूल को दसमी कलास में छोरे पढ़ाई में रद्दी थे अर उनके नाम थे-होशियार सिंह और कशमीर सिंह। उननै जब बेरा पाट्या अक् डी.ओ. चैकिंग करैगी तो कश्मीर मेज तलै जा

-‘वेरी गुड

 

एक अणपढ़ माणस नै अंग्रेजी सीखण का शौंक होग्या। सिखाण आला मास्टर भी भागां करकै ए मिलग्या। एक हफ्ते में तीन शब्द सिखाए-‘यश, नो, वैरी गुड’। अनपढ़ नै तो तीनों रट लिए। इसे बीच में एक दिन गाम में

जुत्ती हाथां म्हें ठार्या सूं

 

एक छिकमा एं कंजूस दुकानदार था। उसकी देखमदेख छोरा उसतै भी घणा मंजी होग्या। एक दिन दुकानदार सांझ नै आण की क्है कै शहर चला गया। दिन छिप गया। बाबु नहीं आया तो छोरा दुकानदार करकै घरा चल्या गया।