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Tag: कविता

पीछा करो उनका

ब्रजेश कृष्ण

 

बड़े चतुर हैं वे

गजब के वाचाल और जादूगर

रूमाल झटकते हैं

तो उड़ने लगती हैं रंग-बिरंगी तितलियां

खाली डिब्बों पर घुमाते हैं अपना हाथ

और आसमान भर जाता है पतंगों से

हमें दिखाई नहीं देती उनकी अदृश्य

डरे हुए समय का कवि

मंगतराम शास्त्री

तब डरे हुए समय का कवि वहाँ पर विराजमान था
जब बिना शहीद का दर्जा पाए लोट रहा था अर्ध सैनिक शहीद
और स्वागत में लीपा जा रहा था आंगन गाय के गोबर से
पवित्र किया जा रहा

क्या कर लिया हमने ?

सुभाष चन्द्र

सदियों से हमें गांवों में
मंदिरों में, स्कूलों में
कहीं घुसने नही दिया गया
क्या कर लिया हमने ?

शम्बुक की हत्या की गयी
एकलव्य का अंगूठा लिया गया
हम से हमारा ही दिमाग छीन लिया
क्या कर

आर. डी. आनंद की कविताएं

(आर. डी. आनंद, भारतीय जीवन बीमा निगम, फैज़ाबाद में उच्च श्रेणी सहायक हैं।  कवि व आलोचक के रूप में स्थापित हैं। दलित समीक्षा में विशिष्ट पहचान है। उनकी 30  से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। )

कर्म-फल

मैं कौन हूँ
पुजारी