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Tag: किसान

गांधी क्या बला है!

चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह

बटलर ने अन्य विषयों के अलावा भारतीय राजनीति पर छाई गांधी नामक परिघटना को भी अपने इस किसान-मित्र के माध्यम से जानना चाहा। जवाब में चौधरी छोटू राम ने गांधी के राजनैतिक कद को इन

अन्नदाता सुण मेरी बात

मंगतराम शास्त्री

अन्ऩदाता सुण मेरी बात तूं हांग्गा ला कै दे रुक्का।
सारे जग का पेट भरै तूं फेर भी क्यूं रहज्या भुक्खा।।

माट्टी गेल्यां माट्टी हो तेरा गात खेत म्हं गळज्या रै
सारी उम्र कमाकै मरज्या तेरी ज्यान रेत

दीपक बिढान – किसान

 कविता


पके अनाज की मंद-मंद गंध,
और पक्षियों का शोर
शादी के मंडप सा माहौल।
फसल का असल रंग
उसे वो बता रहेे हैं,

जिन्होंने नही पकड़ी कभी हाथ दरांती
बेबसी में वो,
सिर झुकाए गर्दन हिला रहा।

नीम के

ललित यादव – हरियाणा में अन्नदाता पर आफत

किसानों के हितों के लिए केंन्द्र के साथ राज्य सरकार ने भी घोषणाएं करने में तो कोई कमी नहीं छोड़ी पर तस्वीर वैसी नहीं है जैसी आम और खास अवसरों पर दिखाई जाती है। किसानों की व्यथा यह है कि