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Tag: कैथल

तुर्कों की निरंकुशता के विरुद्ध-संघर्ष

बुद्ध प्रकाश

24 जून, 1206 को कुतबुद्दीन ऐबक दिल्ली के राजसिंहासन पर बैठा और उत्तरी भारत के तुर्क राज्य की प्रतिष्ठापना की। मध्यवर्ती एशिया के धर्मांध तथा लड़ाकू तुर्क देश के स्वामी बन गए। परन्तु उनका शासन इस्लाम-शासन तो नाममात्र

कर्मचन्द ‘केसर’-सादी भोली प्यारी माँ,

हरियाणवी ग़ज़ल


सादी भोली प्यारी माँ,
सै फुल्लां की क्यारी माँ।

सबके चरण नवाऊं मैं,
मेरी हो चै थारी माँ।

सारी दुनियां भुल्ली जा,
जाती नहीं बिसारी माँ।

बालक नैं सूक्खे पावै,
गीले पड़ै बिच्यारी माँ।

हँस-हँस लाड लड़ावै सै,

कर्मचन्द ‘केसर’-नफरत नै भी प्रीत समझ ले

हरियाणवी ग़ज़ल


नफरत नै भी प्रीत समझ ले,
सबनैं अपणा मीत समझ ले।

लय, सुर, ताल सहीं हों जिसके,
जिन्दगी नै वा गीत समझ ले।

आदर तै मिले पाणी नैं भी,
दूध मलाई सीत समझ ले।

दुनियां खोट्टी, आप्पा आच्छा,

कर्मचन्द ‘केसर’- गलती इतनी भारी नां कर

 हरियाणवी ग़ज़ल


 

गलती इतनी भारी नां कर।
रुक्खां कान्नी आरी नां कर।

मीठी यारी खारी नां कर,
दोस्त गैल गद्दारी नां कर।

नुमाइस की चीज नहीं सै,
औरत नैं बाजारी नां कर।

परोपकार के करले काम,
ठग्गी-चोरी, जारी नां