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Tag: दिनेश दधीचि

मैं क्यों लिखता हूं?

  डॉ. दिनेश दधीचि

(दिनेश दधीचि स्वयं उच्च कोटि के कवि व ग़ज़लकार हैं। और विश्व की चर्चित कविताओं के हिंदी में अनुवाद किए हैं, जिंन्हें इन पन्नों पर आप निरंतर पढ़ते रहेंगे।  रचनाकार के लेखकीय सरोकार, लेखन से उसकी अपेक्षाएं

नयी सुबह तक

कुरुक्षेत्र, 10 मार्च
देस हरियाणा द्वारा स्थानीय महात्मा ज्योतिबा फुले सावित्रीबाई फुले पुस्तकालय में देश की पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शिव रमन गौड के काव्य-संग्रह नयी सुबह तक पर समीक्षा गोष्ठी का

अंततः

वेंडी बार्कर  अनुवाद दिनेश दधिची

एक-दूजे के जलाशय में रहे हम तैरते
रात-भर धुलती रही
घुलती रही चट्टान तट पर
धार से . जल-धार से .
खुरदरे सब स्थल हुए समतल,
घुले पत्थर,
बने बजरी, हुए बालू .

उच्चतम इस

दिनेश दधीचि – वेंडी बार्कर की Eve Remembers कविता का अनुवाद

Wendy Barker (b. 1942 )

Eve Remembers

It was his bending to the path I noticed.
A deliberate dip, a sweep of his long arm.
Blind, we couldn’t know what lay ahead.
He said he was picking up twigs, branches,