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उत्पीड़न घटना नहीं, बल्कि एक विचारधारा ह

विकास साल्याण

IMG_0538.jpgसत्यशोधक फाऊंडेशन और डा.ओमप्रकाश ग्रेवाल अध्ययन संस्थान, कुरुक्षेत्र की ओर से डा. भीम राव अंबेडकर और जोतिबाफुले के जयंती के उपलक्ष में एक विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका विषय

जनपक्षीय राजनीति का मार्ग प्रशस्त करें

प्रोफेसर सुभाष चंद्र

                   सेवा देश दी जिंदड़िए बड़ी ओखी,
गल्लां करणियां ढेर सुखल्लियां ने।
जिन्नां देश सेवा विच पैर पाइया
उन्नां लख मुसीबतां झल्लियां ने।

                                                                       – करतार सिंह सराभा

यह साल जलियांवाला बाग नरसंहार का सौवां साल है। यह घटना

वैचारिक बहस को जन्म दे रही है ‘देस हरिया

प्रोफेसर सुभाष चंद्र

विकास होग्या बहुत खुसी, गामां की तस्वीर बदलगी
भाईचारा भी टूट्या सै, इब माणस की तासीर बदलगी -रामेश्वर गुप्ता

पिछले दस-बारह सालों से ‘हरियाणा नं. 1’ की छवि गढने के लिए हजारों करोड़ रूपये खर्च करके काफी

हिंदी साहित्य अध्ययन-अध्यापनः चुनौतियां

प्रोफेसर सुभाष चंद्र, हिंदी विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय,कुरुक्षेत्र

 1922-25 के आस-पास बी.एच.यू. और इलाहाबाद में हिन्दी विभाग खुलने शुरू हुए थे। अभी  उच्च शिक्षा में एक विषय के तौर पर हिंदी साहित्य-अध्ययन के सौ साल भी नहीं हुए हैं, लेकिन हिंदी