Advertisements

Tag: बी मदन मोहन

सामंती व्यवस्था से टकराता साहित्यकार

  बी. मदन मोहन,    प्रस्तुति—विकास साल्याण

तीसरे हरियाणा सृजन उत्सव के दौरान 9 फरवरी 2019 को ‘लेखक से संवाद’ सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें हिमाचल के प्रख्यात साहित्यकार एस.आर. हरनोट के साथ श्रोताओं ने संवाद करना था, लेकिन स्वास्थ्य के

चिड़िया – बी मदन मोहन

बाल कविता

चिड़िया मेरे घर की छत पर
रोज फुदकती है रुक-रुक
अपनी भाषा में जाने क्या
बोला करती है टुक-टुक।

उसकी बोली को सुन-सुनकर
नन्हें चूजे आ जाते
आंगन में बिखरे दानों को
चीं-चीं करते खा जाते
शैतानी करते

गैस गुबारा – बी. मदन मोहन

बाल कविता

मैं हूं गैस गुबारा भैया ऊंची मेरी उड़ान
नदियां-नाले-पर्वत घूमूं फिर भी नहीं थकान
बस्ती-जंगल बाग-बगीचे या हो खेत-खलिहान
रुकता नहीं कहीं भी पलभर देखूं सकल जहान

उड़ते-उड़ते गया हिमाचल देखा एक स्कूल
नीचे था एक झरना बहता,