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Tag: भीष्म साहनी

राष्ट्रीय एकता और भाषा की समस्याः भीष्म साहनी

साहनी

मैं भाषा वेज्ञानिक नहीं हूं, भाषाएं कैसे बनती और विकास पाती हैं, कैसे बदलती हैं, इस बारे में बहुत कम जानता हूं, इसलिए किसी अधिकार के साथ भाषा के सवाल पर नहीं बोल सकता । मेरी अपनी स्थिति भी अनूठी

हाय मेरे ईश्वर, मेरे गॉड़, वाहे गुरू, हाय मेरे अल्लाह

अमृतलाल मदान 

भीष्म साहनी की स्मृति को समर्पित –

गूँगा बना दिया गया था मुझे
और लँगड़ा भी
धर्म-संचालित पिछले भूचाल द्वारा
आओ तुम भी देखो जो मैं देख रहा हूँ
तड़ाक से खुल गयी इस टूटी खिड़की से
दूर