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Tag: रागनी

भीतरला हो साफ मणस का चाहे रंग बेशक तै काला हो

विक्रम राही

भीतरला हो साफ मणस का चाहे रंग बेशक तै काला हो
हो रंग भी काला दिल भी काला उसका के उपराला हो

भूरा हो जै देखण मैं नर जाणू चांद उजाला देरया हो
बोलण तै पहलां लागै कदे

बेटी गैल्यां धोखा होग्या इब के कह दयूं सरकार तनै

विक्रम राही

बेटी गैल्यां धोखा होग्या इब के कह दयूं सरकार तनै
जै गर्भ बीच तै बचा लई तो आग्गे फेर दई मार तनै

लिंगानुपात सुधर गया इसका कारण हम तम जाणै
छोरियां नै वो कर दिखलाया ना मानणिया भी

झूठ कै पांव नहीं होते

मंगतराम शास्त्री

झूठ कै पांव नहीं होते

सदा जीत ना होया करै छल कपट झूठ बेईमाने की
एक न एक दिन सच्चाई बणती पतवार जमाने की

झूठ कै पांव नहीं होते या दुनिया कहती आवै
भुक्खे की जा बोहड़ कदे

साथ चांदडे माणस का दिया होया तंग करज्यागा

विक्रम राही

साथ चांदडे माणस का दिया होया तंग करज्यागा
जीण जोग भी खामैखा तो बिन आई मैं मरज्यागा

चतुर चलाक बेशर्म आदमी सदा मीट्ठे चोपे लावैगा
कई तरियां के बणा भेष वो रोज बीच मैं आवैगा
मतलब काढ लिकड़