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Tag: लोक कथा

कछुआ और खरगोश – इब्ने इंशा

लोक कथा

एक था कछुआ, एक था खरगोश। दोनों ने आपस में दौड़ की शर्त लगाई। कोई कछुए से पूछे कि तूने शर्त क्यों लगाई? क्या सोचकर लगाई?

बहरहाल…तय यह हुआ कि दोनों में से जो नीम के टीले तक

हुण दस्स चौकीदारा! – हिमाचली लोक कथा

प्रस्तुती – दुर्गेश नंदन

एक चोर था । छोटी-मोटी चोरियां करके अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहा था पर गुज़ारा वामुश्किल होता । चोर ने एक योजना बनाई और एक बड़ा हाथ मारने की ठानी । अपने काम

आपणे की चोट

 राजकिशन नैन
(राजकिशन नैन हरियाणवी संस्कृति के ज्ञाता हैं और बेजोड़ छायाकार हैं। साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में उनके चित्र प्रकाशित होते रहे हैं।)

एक सुनार था। उसकी दुकान के धौरे एक लुहार की दकान बी थी। सुनार जिब काम करदा, तै

सुरेन्द्र पाल सिंह – एक सांड और गधे की मौत

लघु कथा

बचपन में हमारे घर के बगल में एक रेलवे लाइन पर फाटक था जिसके पास एक जोहड़ था। शहर भर की गायें दिन भर उस जोहड़ पर कुछ पालियों के द्वारा आराम करने के लिए लायी जाती थी