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Tag: हरियाणवी कविता

मनजीत भोला की हरियाणवी कविता

 

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दीया

संगीता बैनीवाल

सारे दीखैं तोळा-मासा
मैं तो बस रत्ती भर सूं
माटी म्ह मिल ज्यां इक दिन
माटी तैं फेर बण ज्यां सूं
जितना नेह-तेल भरोगे
उतनी राह रोशन कर ज्यां सूं
धरो बाती जिब मेरे हिया पै
हंसते-हंसते जळ

विपिन चौधरी – ओबरा

हरियाणवी कविता


जद ताती-ताती लू चालैं
नासां तैं चाली नकसीर
ओबरे म्हं जा शरण लेंदे
सिरहानै धरा कोरा घड़ा
ल्हासी-राबड़ी पी कीं
काळजे म्हं पड़दी ठंड
एक कानीं बुखारी म्हं बाळू रेत मिले चणे
अर दूसरे कानीं, गुड़ भरी ताकी

विपिन चौधरी – मेरा सादा गाम

 हरियाणवी कविता


म्हारी बुग्गी गाड्डी के पहिये लोहे के सैं
जमां चपटे बिना हवा के
जूए कै सेतीं जुड़ रहे सैं
मण हामी इसे म्हं बैठ
उरै ताईं पहोंच लिए
रेज्जै का पहरा करे सै म्हारै कुरता
अर बां उपराण