Advertisements

Tag: हिंदी कविता

एकलव्य का लेख

सरबजीत सोही

गुस्ताखी माफ करना गुरु जी!
मैं कहना तो नहीं चाहता,
पर हर जन्म में आपने छला है,
मेरी प्रतिभा को,
कभी शुद्र का सूत कह कर
तो कभी गुरु दक्षिणा के नाम पर
मेरे हाथ के अंगूठे की

छाती, तू और मैं – निकिता आजाद

nikनिकिता आजाद (युनिवर्सिटी ऑफ आक्सफोर्ड) में पढ़ी हैं। उन्होंने  ‘हैपी टु ब्लीड’ लिखे सैनिटरी नैपकिन के साथ अपनी तसवीर पोस्ट करते हुए लोगों को पितृसत्तात्मक रवैए के खिलाफ खड़े होने की अपील की थी और सोशल मीडिया पर #happytobleed

एक खत आपके नाम

कब तक दबाओगे खोलते हुए लावे को ?

भिंचे हुए जबड़े दर्द कर रहे हैं
कितनी देर तक दबाया जा सकता है
अंतर्मन में खौलते लावे को
किसी भी पल खोपड़ी क्रियेटर में बदल जाए
उस से पहले जानलेवा ऐंठन

रमणीक मोहन की कविताएं

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की एक किताब है ‘ग़ुबार-ए-ख़ातिर’ यानी दिल के ग़ुबार। यह किताब उन ख़तों का मज्मूआ है जो उन्होंने 1942 में अपनी गिरफ़्तारी के बाद अहमदनगर कि़ले में नजऱबन्दी के दौरान अपने एक दोस्त को लिखे थे।